रविवार, 27 फ़रवरी 2011

Rista

माना दोस्ती का रिश्ता खून का नही होता
लकिन खून के रिश्ते से कम भी नही होता
दोस्ती मे एक बात मुझे समझ नही आती है
दोस्त मे लाख बुराई हो उसमे अच्छाई ही क्यु नजर आती है
दोस्त बिठाता है आपको सर आखो पर
आपकी सारी परेशानी लेता है अपने उपर
आप की गलती सारी दुनिया से छुपता है
खुद के अच्छे कामो का शेर्य भी आप ही को देता है
दोस्त होता है ऐसे
दीयो के लिए बाती जैसे
अन्धो के लिए लाठी जैसे
प्यासे के लिए पानी जैसे
बच्चे के लिए नानी जैसे
दीयो के लिए बाती जैसे
लेखक के लिए कलम जैसे
बीमार के लिए मलहम जैसे
कुम्हार के लिए माट्टी जैसे
किसान के लिए खेती जैसे
भक्त के लिए वरदान जैसे
मरने वाले के लिए जीवनदान जैसे
अन्त मे आप से एक ही बात है कहना
दोस्त को बुरा लगे ऐसा कोई काम ना करना
खुद भी खुश रहना और दोस्तो को भी रखना
चाहे कितनी भी