शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

आज एक बार फ़िर सुरज को उगता देखो
और चान्द को
चान्दनी रात मे जागता देखो
क्या पता कल ये धरती
चान्द और सुरज हो ना
हो

आज एक बार सबसे मुस्करा के बात करो
बिताये हुये पलों को साथ
साथ याद करो
क्या पता कल चेहरे को मुस्कुराना
और दिमाग को पुराने पल
याद हो ना हो

आज एक बार फ़िर पुरानी बातो मे खो जाओ
आज एक बार फ़िर
पुरानी यादो मे डूब जाओ
क्या पता कल ये बाते
और ये यादें हो ना हो

आज
एक बार मन्दिर हो आओ
पुजा कर के प्रसाद भी चढाओ
क्या पता कल के
कलयुग मे
भगवान पर लोगों की श्रद्धा हो ना हो

बारीश मे आज खुब
भीगो
झुम झुम के बचपन की तरह नाचो
क्या पता बीते हुये बचपन की तरह
कल
ये बारीश भी हो ना हो

आज हर काम खूब दिल लगा कर करो
उसे तय समय
से पहले पुरा करो
क्या पता आज की तरह
कल बाजुओं मे ताकत हो ना हो

आज
एक बार चैन की नीन्द सो जाओ
आज कोई अच्छा सा सपना भी देखो
क्या पता
कल जिन्दगी मे चैन
और आखों मे कोई सपना हो ना हो

क्या पता
कल
हो ना हो