Hindi
हिन्दी एक सशक्त भाषा ही नहीं परंतु
वो हमारी राष्ट्रभाषा एवं
राजभाषा भी है ,परंतु आज जिस प्रकार
सरकारी कार्यालयों मे सितंबर माह मे
हिन्दी दिवस मानने की परंपरा चल
रही है वह अपने आप मे एक सवाल
बनता जा रहा है ? दरअसल हिन्दी के
सबसे बड़े दुश्मन
हिन्दी भाषी क्षेत्रों मे बसने वाले
तथाकथित लोग हैं जो रहते तो भारत मे
हैं परंतु उनका दिल इंडिया मे
बसता है ,वह एक हिन्दुस्तानी की तरह
नहीं सोचते बल्कि इंग्लेंड
अमेरिका की तरह् सोचते व समझते हैं,
उंहें अपनी सभ्यता संस्कृती और अपने
पूर्वजों से चिढ़ है ,ये एक विकृती है,
हमे अपनी सभ्यता व
संस्कृती नहीं भूलना चाहिए? विग्यान
की उन्नति मे किसी एक का योगदान
नहीं होता है . अरब के वैग्यानिको ने
मध्यकालीन युग मे काफी उन्नति किया,
उससे पहले चीन और भारत के लोग
काफी उन्नत थे . भवन निर्माण कला मे
मिस्र देश, चीन काग़ज़,और दूसरे
आविष्कारों के लिए जाना जाता है कहने
का मतलब ये हैकि समय काल उन्नति और
पतन ते करती है , आज जिस मुकाम पर
विकासशील देश मौजूद हैं उस जगह पर
कोई और था , ……..ये भी एक दौर है वह
भी एक दौर था……….आज जिस मुकाम पर
अंग्रेज़ी है वहाँ संस्कृती, अरबी,
और फारसी राज कर चुकी है , प्रत्येक
देश अपनी भाषा के आधार पर
ही सही मानों मे विकास कर
सकता है
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